ग्रीनलैंड विरोध प्रदर्शन पर ट्रंप के अमेरिकी कब्जे वाले दावे ने भड़काया उग्र आंदोलन, PM बोर्डेन सड़कों पर

नई दिल्ली, 18 जनवरी 2026: ग्रीनलैंड में प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन की अगुवाई में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड पर ‘अमेरिकी कब्जे’ या अधिग्रहण के दावों ने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। राजधानी नूक में शनिवार को हुए बड़े विरोध प्रदर्शन ने वैश्विक राजनीति में आर्कटिक क्षेत्र के महत्व को नई बहस दिला दी है ।
ट्रंप के विवादित बयान का पूरा सच
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ग्रीनलैंड को अमेरिका की ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के लिए अहम बताते हुए इसे खरीदने या नियंत्रण में लेने की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड के दुर्लभ खनिज भंडार और रणनीतिक स्थिति अमेरिका के हित में हैं, यहां तक कि ‘बल प्रयोग’ से भी इनकार नहीं किया । यह पहली बार नहीं जब ट्रंप ने ऐसा दावा किया; 2019 में भी उन्होंने डेनमार्क से ग्रीनलैंड खरीदने की पेशकश की थी, जो सिरे से खारिज कर दी गई थी।
ट्रंप के करीबी स्टीफन मिलर ने फॉक्स न्यूज पर कहा कि डेनमार्क ग्रीनलैंड की रक्षा, विकास या वहां रहने की काबिलियत नहीं रखता । इन बयानों ने न सिर्फ ग्रीनलैंडवासियों को उकसाया, बल्कि NATO सहयोगियों के बीच राजनयिक संकट भी पैदा कर दिया। ट्रंप ने विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर 10-25% टैरिफ लगाने की धमकी भी दी ।
नूक में विरोध प्रदर्शन की पूरी तस्वीर
ग्रीनलैंड की राजधानी नूक की सड़कों पर कड़ाके की ठंड के बावजूद 5,000 से अधिक लोग जमा हुए। प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने खुद प्रदर्शन का नेतृत्व किया, हाथों में राष्ट्रीय झंडे और बैनर लेकर । प्रदर्शनकारी ‘Hands off Greenland’, ‘ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है’, ‘हम अमेरिकी नहीं, कभी नहीं होंगे’ जैसे नारे लगा रहे थे।
- प्रदर्शन का केंद्र: नए अमेरिकी कॉन्सुलेट के निर्माणाधीन स्थल के पास मार्च निकाला गया, जहां सिर्फ चार कर्मचारी वाली पुरानी लाल इमारत अब शिफ्ट हो रही है ।
- PM का सख्त संदेश: नीलसन ने कहा, “ग्रीनलैंड कोई सामान नहीं। हमारा भविष्य हम तय करेंगे, अमेरिका या कोई और नहीं” ।
- ट्रंप के पुतले जलाए गए: प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी ध्वज के खिलाफ नारेबाजी की और ‘ट्रंप हटाओ, ग्रीनलैंड बचाओ’ के प्लेकार्ड लहराए ।
- शांतिपूर्ण माहौल: पुलिस ने सुरक्षा सुनिश्चित की, लेकिन नेता चेतावनी दे रहे हैं कि आंदोलन पूरे आर्कटिक क्षेत्र में फैल सकता है ।
यह प्रदर्शन ग्रीनलैंड की 56,000 आबादी के 85% लोगों के विरोध को दर्शाता है, जो सर्वे में सामने आया । डेनमार्क की कोपेनहेगन में भी समानांतर विरोध हुए ।
यह भी पढ़ें:https://thedbnews.in/will-pension-taxes-be-abolished-five-major-demands-on-insurance-and-loans-will-the-middle-class-get-relief/
ग्रीनलैंड क्यों है ट्रंप की नजर में?
ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, जो डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है। यहां दुर्लभ मिट्टी के तत्व (REE), यूरेनियम, सोना जैसे खनिज भंडार हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण हैं । जलवायु परिवर्तन से पिघलती बर्फ नई खनन संभावनाएं खोल रही है।
ट्रंप इसे ‘सोने की चिड़िया’ मानते हैं, जो अमेरिका को चीन और रूस से आगे रखेगा। लेकिन पर्यावरणविद चेताते हैं कि खनन से बर्फीली चट्टानें और खतरे में पड़ेंगी, जो वैश्विक जलस्तर को प्रभावित करती हैं। ग्रीनलैंड की 80% आबादी इनुयित है, जो अपनी संस्कृति और स्वतंत्रता बचाने को तैयार है ।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और टैरिफ युद्ध
ट्रंप के टैरिफ ऐलान से यूरोप में हड़कंप मच गया। फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने कहा, “यूरोप की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं” । डेनमार्क ने NATO की मौजूदगी बढ़ाई और यूरोपीय देशों से सैनिक मांगे ।
रॉयटर्स/Ipsos पोल में केवल 10% अमेरिकी सैन्य कार्रवाई चाहते हैं, बाकी हस्तक्षेप के खिलाफ । व्हाइट हाउस चुप है, लेकिन ट्रंप समर्थक इसे ‘रणनीतिक जरूरी’ बता रहे ।
ऐतिहासिक संदर्भ: ट्रंप का पुराना इतिहास
2019 में ट्रंप ने ग्रीनलैंड खरीदने की योजना रिजॉर्ट प्लान के साथ जोड़ी थी, जिसे डेनमार्क ने ‘असंभव’ बताया। तब क्रिसमस यात्रा रद्द करनी पड़ी। अब 2026 में दोबारा सत्ता में आने के बाद यह मुद्दा गरमा गया । विशेषज्ञ कहते हैं, यह आर्कटिक में चीन की बढ़ती मौजूदगी के खिलाफ कदम है, जहां बीजिंग खनन में निवेश कर रहा ।
ग्रीनलैंड 1953 से डेनमार्क का हिस्सा है, लेकिन 2009 से स्वायत्तता बढ़ी। जनमत संग्रह में पूर्ण स्वतंत्रता की मांग तेज है, लेकिन अमेरिकी दबाव ने इसे जटिल बना दिया ।
आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव
ट्रंप का प्लान सफल होता तो ग्रीनलैंड के खनिज अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बूस्ट देते। लेकिन विरोध से टैरिफ युद्ध छिड़ सकता है, जो यूरोपीय निर्यात को प्रभावित करेगा। पर्यावरणीय चिंता प्रमुख: बर्फ पिघलने से समुद्र स्तर 7 मीटर तक बढ़ सकता है ।
- खनिज महत्व: REE से इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी, मिसाइल बनते हैं।
- जलवायु जोखिम: खनन से प्रदूषण बढ़ेगा, इनुयित संस्कृति खतरे में।
- आर्थिक नुकसान: डेनमार्क को सालाना 500 मिलियन यूरो सब्सिडी ग्रीनलैंड को ।
ग्रीनलैंडवासियों की आवाज: स्थानीय कहानियां
नूक की रहने वाली इनुयित महिला ऐना ने कहा, “हमारी बर्फ हमारी पहचान है, ट्रंप इसे चुरा नहीं सकते” । युवा कार्यकर्ता माइकल बोर्डेन: “हम लड़ेंगे, जैसे पूर्वजों ने किया”। 85% लोकल विरोध अमेरिकी कब्जे का ।
प्रदर्शन में पारंपरिक गीत गाए गए, जो स्वतंत्रता की भावना जगाते हैं। सोशल मीडिया पर #GreenlandIsNotForSale ट्रेंड कर रहा ।
भविष्य का अनुमान: संयुक्त राष्ट्र तक मामला?
PM नीलसन संयुक्त राष्ट्र में शिकायत की तैयारी कर रही हैं। NATO बैठक में चर्चा होगी। ट्रंप अगर दबाव बनाते रहे तो यूरोप-अमेरिका व्यापार युद्ध तेज हो सकता । विशेषज्ञ: “यह भू-राजनीति और जलवायु का टकराव है” ।
डेनमार्क ने सैन्य अभ्यास बढ़ाए। ग्रीनलैंड की जनता एकजुट, लेकिन आर्थिक निर्भरता चुनौती। अपडेट्स के लिए बने रहें।
यह भी पढ़ें:https://thedbnews.in/gold-prices-surge-by-rs-3320-in-just-one-week-check-the-latest-price/

