यूपी ATS: हारिश अली से टेरर फंडिंग, 50 युवा नेटवर्क के खुलासे

लखनऊ, 25 मार्च 2026। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ISIS संदिग्ध हारिश अली से यूपी ATS की 6 घंटे की कठोर पूछताछ ने टेरर फंडिंग, 50 युवाओं के ऑनलाइन नेटवर्क और ISIS हैंडलर से जुड़े चौंकाने वाले खुलासे उजागर कर दिए हैं। एटीएस के अनुसार, हारिश अली एक बड़े रेडिकलाइजेशन नेटवर्क का केंद्रीय चरित्र था, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए उत्तर भारत के युवाओं को आतंकी संगठन ISIS की ओर खींच रहा था। यह मामला न केवल यूपी बल्कि पूरे देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए खतरे की घंटी है।

इस आर्टिकल में हम विस्तार से जानेंगे कि हारिश अली ISIS केस में क्या खुलासे हुए, टेरर फंडिंग कैसे हो रही थी, नेटवर्क की संरचना क्या थी और यूपी ATS ने कैसे इस साजिश का पर्दाफाश किया।
हारिश अली कौन है? बैकग्राउंड और गिरफ्तारी की पूरी कहानी
हारिश अली, 28 वर्षीय लखनऊ निवासी, मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। वह एक साधारण IT प्रोफेशनल के रूप में काम करता था, लेकिन गुप्त रूप से ISIS प्रोपेगैंडा फैला रहा था। यूपी ATS को गुप्त इनपुट मिला था कि लखनऊ के गोमती नगर इलाके में एक फ्लैट से संदिग्ध गतिविधियां हो रही हैं। 20 मार्च को ATS की स्पेशल टीम ने छापा मारा और हारिश को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के समय उसके पास से बरामद सामान:
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5 मोबाइल फोन (एन्क्रिप्टेड ऐप्स से भरे हुए)
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IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने के लिए केमिकल्स
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ISIS के प्रोपेगैंडा वीडियो और ऑडियो फाइल्स
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क्रिप्टो वॉलेट से जुड़े डॉक्यूमेंट्स
ATS के IG ऑपरेशनल, असीम अरुण ने बताया, “हारिश अली नेटवर्क का मास्टरमाइंड था। पूछताछ में उसने सब कबूल कर लिया।”
6 घंटे की मैराथन पूछताछ: टेरर फंडिंग के चौंकाने वाले खुलासे
24 मार्च को ATS के इंटरोगेशन सेंटर में हारिश से 6 घंटे तक पूछताछ चली। इस दौरान सामने आए प्रमुख खुलासे टेरर फंडिंग से जुड़े थे। हारिश ने स्वीकार किया कि:
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विदेशी फंडिंग स्रोत: मुख्य फंडिंग मिडिल ईस्ट और पाकिस्तान से आ रही थी। ISIS के ग्लोबल नेटवर्क से हवाला और क्रिप्टोकरेंसी (जैसे बिटकॉइन, USDT) के जरिए महीने में 10-15 लाख रुपये ट्रांसफर होते थे।
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ट्रांसफर मेथड: हारिश दुबई-बेस्ड एक हैंडलर ‘अबू बकर’ से जुड़ा था, जो हवाला ऑपरेटर्स के जरिए पैसे भारत भेजता था। यूपी में फंड्स को छोटे-छोटे अमाउंट में बांटा जाता था।
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उपयोग: पैसे हथियार खरीदने, ट्रेनिंग कैंप आयोजन और युवाओं को लुभाने के लिए इस्तेमाल होते थे। एक खुलासा यह भी हुआ कि लखनऊ में ही एक गुप्त ट्रेनिंग सेंटर चल रहा था।
टेरर फंडिंग को रोकने के लिए NIA और ED भी जांच में शामिल हो गई हैं।
50 युवाओं का ऑनलाइन नेटवर्क: रेडिकलाइजेशन की खतरनाक साजिश
सबसे बड़ा खुलासा 50 युवाओं के नेटवर्क का था। हारिश ने बताया कि यह नेटवर्क टेलीग्राम, व्हाट्सएप और डार्क वेब चैनलों पर सक्रिय था। नेटवर्क की संरचना इस प्रकार थी:
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रिक्रूटमेंट प्रोसेस: यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर फर्जी अकाउंट्स से युवाओं को लुभाया जाता। खासकर 18-25 साल के बेरोजगार युवा टारगेट थे।
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क्षेत्र: यूपी के लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज; बिहार के पटना, भागलपुर और दिल्ली-NCR में सदस्य सक्रिय।
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साजिश: नेटवर्क का लक्ष्य लखनऊ या कानपुर में बड़े बम धमाके की योजना बना रहा था, खासकर आगामी फेस्टिवल सीजन में।
ATS ने अब तक 8 संदिग्धों को हिरासत में लिया है और बाकी की तलाश जारी है।
ISIS हैंडलर का रोल: पाकिस्तान से कंट्रोल
हारिश ने ISIS हैंडलर ‘उमर खान’ का नाम लिया, जो पाकिस्तान के कराची से ऑपरेट करता है। यह हैंडलर:
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रोजाना वीडियो कॉल पर निर्देश देता था।
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भारत में IED फैब्रिकेशन और टारगेट सिलेक्शन की ट्रेनिंग देता था।
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ISIS के केंद्रीय कमांड से जुड़ा हुआ।
यह खुलासा भारत-पाकिस्तान के बीच टेरर लिंक को मजबूत करता है। MEA ने पाकिस्तान को डिप्लोमैटिक नोट भेजा है।
यूपी ATS की सतर्कता: पिछले केसेज से सबक
यूपी ATS ने पिछले साल भी कई ISIS मॉड्यूल्स तोड़े हैं:
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2025 में मेरठ ISIS मॉड्यूल (5 गिरफ्तार)
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कानपुर में ड्रोन बम साजिश विफल
इस बार इंटेलिजेंस इनपुट और साइबर सर्विलांस ने काम किया। ATS चीफ ने कहा, “हमारी टीम 24×7 अलर्ट पर है।”
प्रभाव और भविष्य की चुनौतियां
यह केस टेरर फंडिंग रोकने और साइबर रेडिकलाइजेशन पर फोकस बढ़ाएगा। युवाओं को जागरूक करने के लिए कैंपेन शुरू हो सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय: क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
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NIA डायरेक्टर: “ऑनलाइन नेटवर्क आतंकवाद का नया चेहरा हैं। सख्त साइबर लॉ जरूरी।”
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साइबर एक्सपर्ट: “क्रिप्टो ट्रांजेक्शन ट्रैकिंग टूल्स अपनाएं।”
FAQ: हारिश अली ISIS केस से जुड़े सवाल
हारिश अली को कितनी सजा हो सकती है?
UAPA के तहत लाइफ इम्प्रिजनमेंट या डेथ पेनल्टी।
टेरर फंडिंग कैसे रोकी जा सकती है?
क्रिप्टो रेगुलेशन और इंटरनेशनल कोऑपरेशन से।
यूपी में ISIS खतरा कितना बड़ा है?
बढ़ रहा है, लेकिन ATS की कार्रवाई प्रभावी।
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