अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जी‑7 विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद पेरिस में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि ईरान के साथ चल रहा सैन्य अभियान “कुछ हफ्तों में खत्म हो सकता है, महीनों में नहीं”। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका की रणनीति जमीन पर बड़े पैमाने पर थल सेना उतारने के बजाय हवाई और मिसाइल हमलों पर केंद्रित है, जिससे युद्ध को तेजी से निष्कर्ष तक ले जाने की संभावना बनी हुई है।

रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि अभियान शुरू होने के बाद से अमेरिकी तैयारियां और कार्य पहले से अधिक तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसके चलते युद्ध को जल्द से जल्द सीमित समय‑सीमा में खत्म करने की योजना पर बल दिया जा रहा है। इस डेडलाइन ने ईरानी हाई कमान और अंतरराष्ट्रीय बाजारों दोनों के लिए एक साफ‑साफ राजनयिक संकेत भेजा है कि अमेरिका लंबे समय तक खुले युद्ध में उलझने की बजाय निश्चित समय‑सीमा में शांति या युद्धविराम की स्थिति तक पहुंचना चाहता है।

9 अप्रैल और 6 अप्रैल: दो संदर्भों में टारगेट डेट

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए एक टारगेट डेट के रूप में 9 अप्रैल 2026 की तारीख सामने रखी है, जिसे वाशिंगटन ने शांति वार्ता और सीजफायर के लिए एक आंतरिक कार्यक्रम के रूप में इस्तेमाल किया है। इस तारीख को लेकर अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यह ईरान के लिए अंतिम चेतावनी और अमेरिका के लिए एक रणनीतिक डेडलाइन दोनों की तरह काम कर सकती है।

इसके समानांतर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले की फिलहाल समय‑सीमा बढ़ाकर 6 अप्रैल कर दी है, जिसे तेहरान के लिए एक और “फाइनल डेडलाइन” जैसा माना जा रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि अमेरिका ने दो स्तर पर डेडलाइन तय की है—एक सैन्य अभियान और दूसरा ऊर्जा क्षेत्र पर हमले का विस्तार—जिससे ईरानी शासन पर अधिक दबाव बनाया जा रहा है।

बूट्स ऑन ग्राउंड की जरूरत नहीं, लेकिन तैनाती बढ़ रही

रुबियो ने जोर देकर कहा कि ईरान के साथ वर्तमान युद्ध में “जमीन पर बूट्स ऑन ग्राउंड” की जरूरत नहीं पड़ेगी, यानी भारी संख्या में थल सेना की लंबी जमीनी लड़ाई की संभावना अमेरिका ने अभी बाहर रखी है। वहीं, अमेरिकी नौसेना और एयरफोर्स सहित अन्य ताकतों को अरब सागर और खाड़ी क्षेत्र में और अधिक मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि हवाई और मिसाइल हमले की गति और प्रभावशीलता बढ़ाई जा सके।

इस रणनीति का मकसद यह है कि ईरानी सैन्य ढांचे और युद्ध‑संचालन क्षमता को जमीनी संघर्ष के जोखिम के बिना ही इतना कमजोर किया जाए कि वह शांति वार्ता या युद्धविराम पर जल्दबाजी में बैठने की स्थिति में आ जाए। इस तरह अमेरिका ने “हवाई युद्ध + राजनयिक दबाव + अंतरराष्ट्रीय समर्थन” त्रिकोण के जरिए युद्धविराम की राह आसान बनाने की कोशिश बताई है।

ईरान के साथ संदेशों का आदान‑प्रदान

रुबियो ने माना है कि ईरानी तरफ से अमेरिका को अभी तक कोई स्पष्ट ऑफिशियल जवाब नहीं मिला है, लेकिन बीच‑बीच में कुछ संकेत और संदेश जरूर पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी सिस्टम की ओर से कुछ संकेत मिले हैं कि वे कुछ मुद्दों पर बातचीत के लिए खुले बैठे हैं, हालांकि अभी तक वह अमेरिकी शांति या सीजफायर प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से स्वीकार नहीं कर पाया है।

इस बीच, वाशिंगटन ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को एक 15‑बिंदु शांति प्रस्ताव भेजा है, जिसमें परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता पर अंकुश, आतंकवादी समूहों को समर्थन बंद करने, और क्षेत्रीय विस्तारवादी नीति बदलने जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, ईरान ने इसे “थोपा गया युद्धविराम समझौता” बताते हुए खारिज कर दिया है और अपनी तरफ से 5 शर्तें रखी हैं, जिनमें अमेरिकी हमले का तुरंत अंत, युद्ध पीड़ितों को मुआवजा और कुछ अन्य क्षेत्रीय दावे शामिल हैं।

अमेरिका का लक्ष्य: मिसाइल क्षमता खत्म करना

मार्को रुबियो ने बार‑बार जोर देकर कहा है कि अमेरिका का मुख्य लक्ष्य ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को पूरी तरह नष्ट करना है, न कि वहां की सरकार का तख्तापलट करना। उनका तर्क है कि जब तक ईरान की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता और उसकी तकनीकी आधारशिला जीवित रहेगी, तब तक वह मिसाइल कार्यक्रम के नाम पर चुपके से परमाणु कार्यक्रम भी बढ़ाता रह सकता है।

रुबियो ने चेतावनी दी है कि अमेरिका की ओर से “सबसे भयंकर हमले अभी बाकी हैं” और अगला चरण ईरान के लिए और भी ज्यादा विनाशकारी हो सकता है, जब तक कि तय लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते। इस तरह, अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी मिसाइल क्षमता, क्षेत्रीय हस्तक्षेप और आतंकवादी समूहों को समर्थन जैसे मुद्दों पर अमेरिकी शर्तें मान ले, नहीं तो हवाई और मिसाइल हमलों का दबाव और तेज कर दिया जाएगा।

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