Karwa Chauth पर इस गांव में महिलाएं नहीं करतीं सोलह श्रृंगार, वजह है सैकड़ों साल पुराना सती का श्राप

मथुरा के सुरीर कस्बे के मोहल्ला बघा में लगभग 200 साल पहले हुई एक दर्दनाक घटना के कारण वहां की महिलाएं करवाचौथ का व्रत नहीं रखतीं और न ही सोलह श्रृंगार करती हैं।

मथुरा के सुरीर कस्बे का बघा मोहल्ला, जो मथुरा जिले की मांट तहसील में स्थित है, एक धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध क्षेत्र है। भौगोलिक रूप से यह यमुना नदी के किनारे मथुरा जिले में स्थित है, जिसका भूभाग प्राचीन काल से ही महत्वपूर्ण रहा है। मथुरा का इतिहास लगभग 2500 वर्ष पुराना माना जाता है और यह श्री कृष्ण की जन्मभूमि के रूप में प्रसिद्ध है। मथुरा को प्राचीन युग में सुरसेना साम्राज्य की राजधानी भी माना जाता था, जो मौर्य, ग्रीक, सिथियन, कुशाण और हर्षवर्धन जैसे कई प्राचीन शासकों के अधीन रहा है।
सामाजिक दृष्टि से, बघा मोहल्ला में एक अनूठी सामाजिक परंपरा विकसित हुई है, जहां लगभग 200 साल पहले की एक घटना के कारण करवा चौथ व्रत, सोलह श्रृंगार और अन्य संबंधित रीति-रिवाज नहीं निभाए जाते। इसके पीछे एक स्थानीय कथा और संस्कार हैं जो मोहल्ले की सामाजिक जीवन में गहरे जुड़े हैं। इस मोहल्ले की सामाजिक संरचना में स्थानीय जाति, परंपराएं, और धार्मिक विश्वास मुख्य भूमिका निभाते हैं।
यह क्षेत्र मुख्य रूप से कृषक, व्यापारी, और धार्मिक समुदायों का निवास स्थान है। सामाजिक इतिहास में इस मोहल्ले और आसपास के गांवों में कबीलों, जातियों और परिवारों की पंक्तिबद्धता, स्थानीय उत्सव, और धार्मिक संस्थाएं शामिल हैं, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध बनाती हैं।
मथुरा क्षेत्र का धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व, साथ ही साथ स्थानीय परंपराओं की अद्वितीयता, बघा मोहल्ले को एक विशिष्ट पहचान देता है।
स्रोतों के अनुसार, मथुरा का व्यापक ऐतिहासिक और धार्मिक सन्दर्भ भी समझा जा सकता है, जिसमें मथुरा के प्राचीन साम्राज्यों की जानकारी, धार्मिक स्थलों का इतिहास और स्थानीय सांस्कृतिक परंपराएं शामिल हैं.
उस समय एक नवविवाहित युवक की हत्या कर दी गई, जिसके बाद उसकी विधवा पत्नी ने सती हो जाने से पहले मोहल्ले के लोगों को श्राप दिया कि अगर कोई महिला करवा चौथ का व्रत रखेगी तो वह विधवा हो जाएगी। इस श्राप के बाद मोहल्ले में कई नवविवाहिता महिलाएं विधवा हुईं, अतः इस प्रथा को लेकर महिलाओं ने यह व्रत और पूजा त्याग दी है। यहां तक कि अहोई अष्टमी का व्रत भी नहीं रखा जाता। मोहल्ले में सती का मंदिर बनाकर उसकी पूजा की जाती है, लेकिन करवा चौथ और सोलह श्रृंगार जैसी परंपराएं अब नहीं निभाई जातीं। इस घटना के कारण इस क्षेत्र में एक अनोखा सांस्कृतिक प्रतिबंध बन गया है, जो आज भी जारी है और महिलाएं इस श्राप के कारण करवाचौथ व्रत नहीं रखतीं हैं। रामनगला के लोग इस मोहल्ले का पानी भी पीना पसंद नहीं करते हैं.

