दिल्ली में फूलने लगी लोगों की सांसें, दिवाली से पहले एयर क्वालिटी बेहद खराब,AQI 350 पार

दिल्ली में दिवाली से पहले ही वायु प्रदूषण का स्तर बहुत खराब हो चुका है, जहां कई इलाकों में AQI 350 के पार पहुंच गया है, जैसे आनंद विहार में 369, अक्षरधाम में 369 और वजीरपुर में 329। यह स्तर “बेहद खराब” श्रेणी में आता है और इससे लोगों की सांस लेने में दिक्कतें होने लगी हैं।

सांस फूलने, आंखों में जलन, और अस्थमा, सीओपीडी जैसे फेफड़ों की बीमारियों वाले लोगों के लिए हालात गंभीर हो गए हैं। वृद्ध, बच्चे और पहले से बीमार लोगों को खासतौर पर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-1 लागू हो चुका है, जिसमें प्रदूषण कम करने के लिए निर्माण कार्यों और डीजल जनरेटर के उपयोग पर रोक लगाई गई है। यह स्थिति दिवाली के जश्न के बीच स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है, और विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता और भी खराब हो सकती है, जिससे सांस की बीमारियों के साथ-साथ जोड़ों और हड्डियों की समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। लोगों को बाहर कम निकलने, मास्क पहनने और प्रदूषण से बचाव के अन्य उपायों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।
क्या AQI 350 पर तुरंत क्या सावधानियाँ बरतें
AQI 350 के स्तर पर हवा बहुत खराब होती है और यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इस स्थिति में तुरंत निम्न सावधानियां बरतनी चाहिए:
स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां
- बाहर निकलने से जितना संभव हो, बचें, खासकर बच्चों, वृद्धों, और फेफड़ों या दिल की बीमारियों वाले लोगों के लिए।
- यदि बाहर जाना आवश्यक हो तो उच्च गुणवत्ता वाला मास्क (जैसे N95) पहनें जिससे प्रदूषित हवा अंदर न जाए।
- सांस फूलने, खांसी, गले में खराश या चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।
घर में सुरक्षा उपाय
- घर और ऑफिस के दरवाजे-खिड़कियां बंद रखें ताकि अंदर धूल और प्रदूषित हवा न आए।
- एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें, यदि उपलब्ध हो तो।
- फिजिकल एक्टिविटी और भारी व्यायाम से बचें, खासकर बाहर।
अन्य सावधानियां
- जलाने वाले काम जैसे कंडक्शन, पटाखे जलाना, लकड़ी आदि जलाने से बचें।
- वाहन चलाते समय विशेष ध्यान दें, और प्रदूषण कम करने वाले मॉडर्न वाहनों का उपयोग करें।
- सरकारी निर्देशों और ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का पालन करें।
इन सावधानियों से गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को कम किया जा सकता है और सांस की तकलीफों से बचा जा सकता है।

