बांके बिहारी खजाने के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने सरकार पर तंज किया,इतना भी लालच अच्छा नहीं’…

बांके बिहारी मंदिर के खजाने के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार किया है, जिसमें उन्होंने धार्मिक परियोजनाओं के नाम पर भ्रष्टाचार और लालच का आरोप लगाया है. उनका कथन है कि सरकार बड़े मंदिरों पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण कर रही है और पारंपरिक प्रबंधकों के अधिकारों को छीन रही है.

खजाने के खुलने की घटना
2025 के अक्टूबर में, वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर का खजाना 54 साल बाद खोला गया. इस खजाने में लकड़ी के बक्से, टूटे लोहे के टुकड़े, तीन बड़े तांबे के बर्तन, एक बड़ी तांबे की प्लेट, चार गोल पत्थर, एक लकड़ी का बिस्तर, दो छोटे लकड़ी के बक्से, एक चांदी का छत्र और 1970 के दशक के कुछ दस्तावेज मिले. इस खोलने की प्रक्रिया पर विवाद उठा, क्योंकि कुछ पुजारियों ने आरोप लगाया कि सरकार ने खजाने की वास्तविक सामग्री छिपाई है और इसे लाइव प्रसारित नहीं किया गया.
अखिलेश यादव के आरोप
अखिलेश यादव ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह धार्मिक विकास परियोजनाओं के नाम पर भूमि अधिग्रहण कर रही है, स्थानीय लोगों को विस्थापित कर रही है और भ्रष्टाचार के जरिए अपनी जेब भर रही है. उन्होंने बांके बिहारी मंदिर के लिए प्रस्तावित कॉरिडोर परियोजना को लेकर भी आपत्ति जताई और इसे “भाजपाई महाभ्रष्टाचार” का उदाहरण बताया. उनका कहना है कि सरकारी प्रबंधन के बहाने भाजपा और उसके सहयोगी मंदिरों पर कब्जा कर रहे हैं.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह आरोप उत्तर प्रदेश में भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे के खिलाफ एक राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए हिंदू मतदाताओं के बीच अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं. भाजपा ने इन आरोपों को “पाखंड” करार दिया है.
बांकेबिहारी मंदिर के खजाने की हालिया जांच का विवरण
बांकेबिहारी मंदिर के खजाने की हालिया जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत एक विशेष समिति द्वारा की गई है। यह खजाना लगभग 54 वर्षों से ताले में था और हाल ही में इस ताले को खोला गया। जांच में मंदिर के चार संदूक खुले, जिनमें कुछ चांदी के बर्तन, एक चांदी की छत्र और अन्य धार्मिक उपयोग की वस्तुएं मिलीं। हालांकि, पुजारियों और मंदिर के अन्य पारंपरिक प्रबंधकों ने इस जांच में पाए गए खजाने को बहुत सीमित बताया है और आरोप लगाया है कि मंदिर के खजाने में और भी महत्वपूर्ण तथा कीमती वस्तुएं छुपाई जा सकती हैं।
खजाने के खुले होने की पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में पारदर्शिता के साथ संपन्न की गई, तथा इस दौरान मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे। खजाने की वास्तविक कीमत और उसकी संपूर्ण जानकारी अब भी विवादों के घेरे में है क्योंकि मंदिर की पारंपरिक समिति ने सरकार द्वारा मंदिर के प्रबंधन में हस्तक्षेप को लेकर चिंता व्यक्त की है।
इस जांच ने मंदिर के आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व पर भी नया ध्यान खींचा है, साथ ही इस पर राजनीति भी गरमाई है, जिसमें प्रमुख विपक्षी नेता अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर मंदिरों का राजनीतिकरण करने और धार्मिक संगठनों पर नियंत्रण करने के आरोप लगाए हैं.

