यूपी मदरसों में फर्जी बायोमेट्रिक अटेंडेंस घोटाला: टीचरों ने करोड़ों सैलरी वसूली!

जौनपुर/बाराबंकी | 2 मई 2026 : उत्तर प्रदेश के मदरसों में फर्जी बायोमेट्रिक अटेंडेंस का सनसनीखेज घोटाला सामने आया है। जौनपुर और बाराबंकी जिले के दर्जनों मदरसों में शिक्षकों ने चालाकी भरी तरकीब अपनाई – सुबह कार्ड स्वाइप कर अंगूठे का निशान लगाया और फिर पूरे दिन गायब।

इस UP मदरसा अटेंडेंस स्कैम से करोड़ों रुपये की सरकारी सैलरी हजम हो गई। विभागीय जांच में 50 से ज्यादा टीचरों पर शिकंजा कस गया है। क्या यह शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलने वाला मामला है? आइए, पूरी स्टोरी डिटेल में जानें।
फर्जी बायोमेट्रिक अटेंडेंस कैसे काम कर रहा था? चालाकी का पूरा खुलासा
मदरसों में फर्जी हाजिरी का यह खेल बेहद साधारण लेकिन प्रभावी था। उत्तर प्रदेश सरकार ने 2023 में मदरसों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लागू किया था, ताकि शिक्षकों की उपस्थिति पारदर्शी हो। लेकिन जौनपुर के मदरसा अल-हुदा और बाराबंकी के मदरसा इस्लामिया जैसे संस्थानों में टीचरों ने इसे ठेंगा दिखा दिया।
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स्टेप 1: सुबह 8 बजे स्कूल पहुंचकर बायोमेट्रिक मशीन पर कार्ड स्वाइप और थंबप्रिंट रिकॉर्ड।
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स्टेप 2: शाम 4 बजे दोबारा वही प्रक्रिया, लेकिन बीच में कहीं नहीं दिखे।
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स्टेप 3: सिस्टम में 100% अटेंडेंस शो, सैलरी ऑटोमैटिक क्रेडिट।
जांच टीम ने पाया कि जौनपुर के एक मदरसे में 12 शिक्षक महीने में औसतन 25 दिन ‘हाजिर’ दिखे, जबकि रैंडम सर्वे में सिर्फ 2 ही मिले। बाराबंकी में तो मामला और गंभीर – 20 टीचरों ने 6 महीने से यह धंधा चला रखा था। अनुमान है कि इस फर्जी बायोमेट्रिक अटेंडेंस स्कैम से 2 करोड़ से ज्यादा की सैलरी डकार ली गई।
प्रभावित मदरसों की लिस्ट: जौनपुर-बाराबंकी टॉप पर
यह टेबल जांच रिपोर्ट पर आधारित है। स्रोत: उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक कल्याण विभाग।
विभागीय लापरवाही: ऑनलाइन ऑथेंटिकेशन न होने से घोटाला फला-फूला
उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग की बड़ी चूक इस घोटाले की जड़ है। बायोमेट्रिक सिस्टम तो लगा, लेकिन ऑनलाइन वेरिफिकेशन और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग का इंतजाम नहीं। निरीक्षण अधिकारी साल में 1-2 बार ही आते, वो भी पूर्व सूचना देकर।
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कोई CCTV कैमरा नहीं।
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जीपीएस ट्रैकिंग या फोटो कैप्चर सिस्टम अनुपस्थित।
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सैलरी पेमेंट मैन्युअल चेकिंग पर निर्भर।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “2024 से शिकायतें आ रही थीं, लेकिन बजट की कमी से सुधार नहीं हो सका।” अब यूपी मदरसा घोटाला ने पूरे राज्य की 5000+ मदरसों पर सवाल खड़े कर दिए। क्या लखनऊ, आजमगढ़ या मेरठ में भी यही हो रहा?
राजनीतिक रंग: विपक्ष ने सरकार को घेरा, BJP ने सफाई दी
यह टीचर सैलरी स्कैम अब राजनीति का मुद्दा बन गया। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा, “योगी सरकार की लापरवाही से मदरसों का बंटाधार। फर्जी अटेंडेंस पर करोड़ों लुटे!” वहीं, BJP ने पलटवार किया – “यह पुरानी कांग्रेस-सपा की देन है, हम सख्ती करेंगे।”
मदरसा बोर्ड चेयरमैन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया:
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सभी आरोपी टीचर सस्पेंड।
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सैलरी वसूली के लिए FIR।
-全省 में बायोमेट्रिक सिस्टम अपग्रेड।
छात्रों पर असर: शिक्षा का स्तर गिरा, भविष्य खतरे में
सबसे दुखद है छात्रों का नुकसान। जौनपुर के मदरसा अल-हुदा में 200 बच्चों को ठीक से पढ़ाई नहीं मिली। अभिभावक रवि शर्मा ने कहा, “बच्चे आते हैं, टीचर गायब। सरकारी पैसे कहां जा रहे?” विशेषज्ञों का मानना है कि मदरसों में फर्जी हाजिरी से क्वालिटी एजुकेशन प्रभावित हुई।
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ड्रॉपआउट रेट 15% बढ़ा।
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बोर्ड एग्जाम रिजल्ट 20% गिरा।
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छात्रों में असुरक्षा की भावना।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य: यूपी के बाद अन्य राज्यों में अलर्ट
उत्तर प्रदेश मदरसा घोटाला ने बिहार, झारखंड और राजस्थान जैसे राज्यों को हिलाकर रख दिया। बिहार में पटना हाईकोर्ट ने मदरसों की अटेंडेंस जांच के आदेश दिए। केंद्र सरकार ने NTA और UPSC जैसी परीक्षाओं के पैटर्न पर सवाल उठाए – क्या सरकारी स्कूलों में भी यही हो रहा?
समान घोटालों की हिस्ट्री
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2019, दिल्ली: सरकारी स्कूलों में फर्जी टीचर, 10 करोड़ का घोटाला।
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2022, महाराष्ट्र: बायोमेट्रिक टैंपरिंग, 25 टीचर अरेस्ट।
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2024, यूपी: प्राइमरी स्कूल अटेंडेंस स्कैम, 5 करोड़ रिकवर।
सरकार की कार्रवाई: क्या होगा अगला स्टेप?
शिक्षा मंत्री ने 48 घंटे में रिपोर्ट मांगी। प्रस्तावित सुधार:
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फेस रिकग्निशन बायोमेट्रिक लागू।
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मासिक रैंडम निरीक्षण।
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ऐप-बेस्ड रिपोर्टिंग अभिभावकों के लिए।
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सख्त सजा: 7 साल जेल + पूरी सैलरी वसूली।
विशेषज्ञों की राय: सिस्टम ओवरहाल जरूरी
एजुकेशन एक्सपर्ट डॉ. राकेश मिश्रा कहते हैं, “बायोमेट्रिक अकेला काफी नहीं। AI-बेस्ड मॉनिटरिंग लानी होगी।” NGO ‘शिक्षा बचाओ’ ने सर्वे किया – 70% मदरसों में समस्याएं।
भविष्य की चिंता: मदरसा सुधार पर फोकस
यूपी फर्जी अटेंडेंस केस ने साबित कर दिया कि तकनीक के बिना पारदर्शिता नामुमकिन। सरकार अगर समय रहते सुधार न करे, तो मदरसा शिक्षा का भविष्य खतरे में। अभिभावक सतर्क हैं, विपक्ष हमलावर। अब गेंद शिक्षा विभाग के पाले में।
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