दिल्ली-NCR कोहरे का कहर: 148 फ्लाइट्स रद्द, ट्रेनें लेट, AQI 450+ | प्रदूषण-Alerts

दिल्ली-एनसीआर में सर्दी का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार सुबह राजधानी पर छाए घने कोहरे और प्रदूषण ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। कोहरे की इतनी घनी चादर छाई कि विजिबिलिटी 50 मीटर से भी नीचे चली गई। इस कारण दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) पर हवाई संचालन लगभग ठप पड़ गया।

जानकारी के अनुसार, खराब मौसम और कम दृश्यता की वजह से 148 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि दो फ्लाइट्स को डायवर्ट करना पड़ा। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों सेक्टरों की उड़ानों पर इसका व्यापक असर पड़ा है।
एयरपोर्ट पर सुबह से यात्रियों की भारी भीड़ देखी गई। कई लोग अपनी फ्लाइट्स कैंसल होने की सूचना मिलते ही असमंजस में पड़ गए। कुछ यात्री एयरपोर्ट से लौट गए तो कुछ अगले शेड्यूल का इंतजार करते रहे। एयरलाइंस की ओर से लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे यात्रा से पहले अपनी फ्लाइट की स्थिति ऑनलाइन चेक करें या ग्राहक सेवा से संपर्क करें।
रेलमार्ग भी पटरी से उतरा, देरी से चल रहीं ट्रेनें
सिर्फ हवाई सेवाएं ही नहीं, बल्कि रेल परिचालन भी कोहरे की चपेट में आ गया है। रेल मंत्रालय के मुताबिक, दिल्ली से होकर गुजरने वाली अनेक लंबी दूरी की ट्रेनें 3 से 8 घंटे की देरी से चल रही हैं। राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी प्रमुख ट्रेनों का टाइम-टेबल भी बिगड़ गया है।
रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशन डिस्प्ले बोर्ड्स और मोबाइल ऐप पर रीयल-टाइम अपडेट जारी करने की व्यवस्था की है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा से पहले ट्रेन का समय जरूर जांच लें ताकि अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके।
जहरीली हवा ने बढ़ाई सांस लेने की दिक्कतें
दिल्ली में इस समय वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) फिर से 450 से ऊपर पहुंच गया है, जो ‘गंभीर श्रेणी (Severe Category)’ में आता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्तर की हवा में कुछ घंटे रहना भी स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, खासकर बुजुर्गों, बच्चों और अस्थमा रोगियों के लिए।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने बताया कि धूल, वाहन उत्सर्जन, पराली जलाने के प्रभाव और ठंडी हवाओं के ठहराव ने मिलकर स्मॉग की यह खतरनाक स्थिति पैदा की है। कोहरे के साथ स्मॉग और प्रदूषक तत्व मिलकर “स्मॉग लेयर” बनाते हैं, जिससे सूरज की रोशनी धरती तक नहीं पहुंच पाती और हवा साफ़ नहीं हो पाती।
स्वास्थ्य विभाग की चेतावनी और एडवाइजरी
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की अपील की है। एडवाइजरी में कहा गया है कि लोग सुबह के समय सैर या व्यायाम से बचें, घरों में एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें और बाहर निकलते समय मास्क पहनना न भूलें।
अस्पतालों में भी सांस और फेफड़ों की तकलीफ वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार, लगातार जहरीली हवा में सांस लेने से खांसी, गले में जलन, आंखों में सूजन और सिरदर्द की शिकायतें आम हो गई हैं।
सड़कों पर रेंगते वाहन, ट्रैफिक पुलिस सतर्क
कोहरे का असर राजधानी की सड़कों पर भी साफ नजर आया। सुबह-सुबह ऑफिस टाइम में ट्रैफिक कई जगहों पर रेंगता हुआ दिखाई दिया। विशेष रूप से आउटर रिंग रोड, नोएडा लिंक रोड, गुरुग्राम एक्सप्रेसवे और द्वारका मार्गों पर वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया।
ट्रैफिक पुलिस लगातार स्मॉग अलर्ट जारी कर रही है और लोगों को हेडलाइट्स चालू रखकर सावधानीपूर्वक वाहन चलाने की अपील कर रही है। फॉग लाइट्स के उपयोग और वाहन दूरी बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।
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मौसम विभाग का अनुमान: अभी नहीं मिलेगा राहत
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बताया कि अगले 48 से 72 घंटों तक दिल्ली-एनसीआर में घना कोहरा और ठंडी हवाएं बनी रहेंगी। तापमान में लगातार गिरावट तो होगी, लेकिन हवा की दिशा और गति में सुधार न होने के चलते प्रदूषण के स्तर में तेजी से सुधार की संभावना फिलहाल नहीं है।
IMD वैज्ञानिकों ने बताया कि न्यूनतम तापमान 6 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है, जबकि दिन में भी सूरज की रोशनी कम ही देखने को मिलेगी। यह स्थिति नए साल की शुरुआत तक बनी रह सकती है।
प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास जारी
दिल्ली सरकार ने इस संकट को देखते हुए प्रदूषण से निपटने के लिए कई उपाय अपनाने शुरू कर दिए हैं। ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत निर्माण गतिविधियों पर रोक, डीजल जनरेटरों के उपयोग पर प्रतिबंध और वाहन जांच अभियान को सख्ती से लागू किया जा रहा है।
पर्यावरण मंत्री ने कहा है कि सरकार लगातार मॉनिटरिंग कर रही है और जनता से सहयोग की अपील करती है। साथ ही, एनसीआर के राज्यों से भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि क्षेत्रीय स्तर पर इस समस्या से निपटा जा सके।
नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल राहत के आसार कम हैं, इसलिए लोगों को सतर्क रहना जरूरी है। बुखार, सांस फूलना या सीने में जकड़न महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। स्कूलों को भी बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर आउटडोर गतिविधियों पर रोक लगाने की सलाह दी गई है।

