बीते कुछ हफ्तों में वैश्विक आर्थिक माहौल में बदलते हालातों के बीच कीमती धातुओं — खासकर सोना और चांदी — की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डॉलर की कमजोरी और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में संभावित स्थिरता के संकेतों के चलते निवेशकों का भरोसा पारंपरिक संपत्तियों पर बढ़ा है।

भारत में पिछले एक सप्ताह में सोने और चांदी दोनों के भावों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के चलते सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोना-चांदी एक बार फिर पहली पसंद बन गए हैं।

घरेलू बाजार में सोना-चांदी की कीमतों में उछाल

दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर और सूरत जैसे प्रमुख बाजारों में सोने की कीमतें तेजी से चढ़ी हैं। मंगलवार को 24 कैरेट सोना 10 ग्राम पर ₹500 की बढ़त के साथ ₹74,200 तक पहुंच गया, जबकि चांदी 1 किलो पर ₹1,200 चढ़कर ₹92,800 के पार चली गई। पिछले महीने की तुलना में सोना करीब ₹2,200 और चांदी लगभग ₹4,500 महंगी हो चुकी है।

देश के बुलियन ट्रेडर्स का कहना है कि स्थानीय बाजारों में मांग बढ़ने से यह तेजी बनी हुई है, खासकर शादी के सीजन और निवेश के रुझान के कारण। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर इंडेक्स के कमजोर होने से विदेशी निवेश भी भारतीय बाजारों की ओर आ रहा है।

वैश्विक कारक: डॉलर इंडेक्स और तेल की कीमतों का असर

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले प्रमुख मुद्राओं के मजबूत होने और कच्चे तेल के दामों में उछाल का सीधा असर कमोडिटी मार्केट पर देखा जा रहा है। अमेरिका में मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने की उम्मीद से सोने की मांग में तेजी आई है।

साथ ही, मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और यूरोप की आर्थिक सुस्ती ने भी निवेशकों को सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की ओर आकर्षित किया है।

निवेशकों और विशेषज्ञों की राय

कमोडिटी एक्सपर्ट्स के अनुसार, फिलहाल बाजार में जो तेजी है, वह अल्पकालिक नहीं बल्कि मध्यम अवधि तक रह सकती है। यदि डॉलर की कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अनिश्चितता जारी रहती है, तो सोना 10 ग्राम ₹76,000 तक और चांदी ₹95,000 प्रति किलो तक पहुंच सकती है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशक जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय क्रमिक निवेश (Systematic Investment) अपनाएं। गोल्ड ETF और सिल्वर फंड जैसे विकल्प भी निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

भारत में सोने की मांग का बढ़ता रुझान

भारत में सोना सिर्फ निवेश ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की चौथी तिमाही में भारत में सोने की मांग में 12% तक की वृद्धि दर्ज की गई है। ग्रामीण इलाकों में फसल की बेहतर पैदावार और बढ़ी हुई आय ने भी उपभोग को सहारा दिया है।

इसके अलावा, सरकारी गोल्ड बॉन्ड स्कीम और डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म के विस्तार से युवा निवेशकों का रुझान भी तेजी से बढ़ा है।

आने वाले दिनों का अनुमान

विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर आर्थिक स्थिरता लौटती है तो कीमती धातुओं की कीमतों में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है, लेकिन फिलहाल बाजार में तेजी बनी रह सकती है। ग्लोबल मार्केट की गतिविधियां, डॉलर की चाल और ब्याज दरें आने वाले महीनों में सोना-चांदी के ट्रेंड को तय करेंगी।

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