अहमदाबाद, 12 जनवरी 2026: उत्तरायण के उमंग भरे मौके पर साबरमती रिवरफ्रंट रंग-बिरंगे पतंगों की चहल-पहल से गूंज उठा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने संयुक्त रूप से इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल 2026 का उद्घाटन किया। यह आयोजन न केवल गुजरात की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है, बल्कि भारत-जर्मनी के मजबूत कूटनीतिक संबंधों का भी प्रतीक बन गया।​

दोनों नेताओं ने पतंग उड़ाई, जिससे आसमान में रंगीन छटा बिखर गई। लाखों दर्शकों ने इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए नदी किनारे डेरा डाला। यह महोत्सव मकर संक्रांति से ठीक पहले शुरू होकर तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें वैश्विक पतंग उड़ाकुओं की भागीदारी रहेगी।​

पृष्ठभूमि: उत्तरायण और पतंग महोत्सव की परंपरा

गुजरात में उत्तरायण का त्योहार सूर्य के उत्तरायण प्रवेश का प्रतीक है, जो फसल कटाई के बाद खुशहाली का संदेश लाता है। पतंग उड़ाना इसकी आत्मा है, जहां ‘ईयो पतंग उड़े रे’ की गूंज पूरे राज्य में सुनाई देती है। साबरमती रिवरफ्रंट पर होने वाला यह इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल 1989 से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है, जो अब वैश्विक स्तर पर पहुंच चुका है।​

इस बार महोत्सव का थीम ‘काइट्स ब्रिजिंग नेशंस थ्रू कल्चर’ रखा गया, जो सांस्कृतिक एकता पर जोर देता है। गुजरात सरकार और अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ने महीनों की तैयारी के बाद इस आयोजन को भव्य रूप दिया। 50 देशों से 135 अंतरराष्ट्रीय पतंग उड़ाकू, भारत के 65 उड़ाकू और गुजरात के 871 स्थानीय प्रतिभागी इसमें शरीक हुए।​

उद्घाटन समारोह: मोदी और मर्ज की संयुक्त भागीदारी

12 जनवरी को दोपहर में साबरमती रिवरफ्रंट पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने पहले जर्मन चांसलर का पारंपरिक गुजराती स्वागत किया। फिर दोनों ने मंच पर पहुंचकर रिबन काटा और पतंग उड़ाने का शुभारंभ किया। पीएम मोदी ने सफेद पतंग उड़ाई, जबकि चांसलर मर्ज ने नीली पतंग को आकाश में छोड़ा। दर्शकों ने तालियों और ‘भारत माता की जय’ के नारों से समां बांध दिया।​

कार्यक्रम में गुजराती लोक नृत्य, गरबा और डांडिया प्रदर्शन हुए। आकाश में विशालकाय पतंगें उड़ीं, जिनमें भारत का तिरंगा, जर्मनी का झंडा और महात्मा गांधी की छवि वाली पतंगें प्रमुख रहीं। यह दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जहां #UttarayanaFestival2026 ट्रेंड करने लगा।
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कूटनीतिक महत्व: भारत-जर्मनी संबंधों को नई ऊंचाई

जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की यह भारत की पहली आधिकारिक यात्रा थी। इससे पहले 6 जनवरी को दोनों नेताओं ने साबरमती आश्रम जाकर बापू को श्रद्धांजलि दी थी। पीएम मोदी ने कहा, “पतंग उड़ाना बचपन की यादें ताजा करता है और दो देशों के बीच दोस्ती को मजबूत बनाता है।” चांसलर मर्ज ने गुजराती संस्कृति की तारीफ की और कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के आर्थिक-सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ाएगी।​

यह दौरा द्विपक्षीय व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और टेक्नोलॉजी पर चर्चाओं का हिस्सा था। जर्मनी भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, और इस महोत्सव ने अनौपचारिक कूटनीति का बेहतरीन उदाहरण पेश किया। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच और समझौते होने की उम्मीद है।​

वैश्विक भागीदारी और आकर्षण के केंद्र

महोत्सव में ऑस्ट्रेलिया, जापान, ब्राजील, UAE समेत 50 देशों के पतंग विशेषज्ञ शामिल हुए। इनमें 100 फुट ऊंची ‘मेगा काइट्स’ उड़ाई गईं, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने वाली थीं। स्थानीय उड़ाकूओं ने ‘पटांग’ और ‘मणजा’ का प्रदर्शन किया, जो गुजरात की पारंपरिक कला है।​

साबरमती रिवरफ्रंट को विशेष रूप से सजाया गया, जहां फूड स्टॉल्स पर गुजराती व्यंजन जैसे उंधियू, चिक्की और तिल गुड़ लड्डू उपलब्ध हुए। शाम को लेजर शो और फायरवर्क्स ने समां बांधा। पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा हुआ, जिससे अहमदाबाद की अर्थव्यवस्था को बल मिला।​​

गुजरात सरकार की तैयारियां और सुरक्षा व्यवस्था

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बताया कि 10 से 12 जनवरी तक चले गुजरात दौरे में पीएम ने कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया। महोत्सव के लिए 5000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए, जिसमें ड्रोन सर्विलांस और CCTV निगरानी शामिल थी। ट्रैफिक डायवर्जन और पार्किंग व्यवस्था ने किसी असुविधा को रोका।​​

पर्यावरण के प्रति जागरूकता के तहत इको-फ्रेंडली पतंगें इस्तेमाल की गईं, और प्लास्टिक मुक्त अभियान चलाया गया। यह आयोजन सस्टेनेबल टूरिज्म का मॉडल बन गया।

सोशल मीडिया और जन प्रतिक्रिया

ट्विटर, इंस्टाग्राम पर वीडियो वायरल हुए, जहां पीएम मोदी का पतंग उड़ाते हुए वीडियो 10 लाख से ज्यादा बार देखा गया। गुजरात के युवाओं ने इसे ‘कल्चरल डिप्लोमेसी’ का नाम दिया। विपक्षी दलों ने भी सराहना की, हालांकि कुछ ने भीड़ प्रबंधन पर सवाल उठाए।​

यह महोत्सव उत्तरायण की परंपरा को आधुनिक वैश्विक मंच पर ले गया, जो आने वाले वर्षों में और भव्य होगा।

भविष्य की संभावनाएं और प्रभाव

यह आयोजन गुजरात को टूरिस्ट हब बनाने की दिशा में मील का पत्थर है। अगले साल और अधिक देशों की भागीदारी की योजना है। भारत-जर्मनी संबंधों में यह कदम रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगा। साबरमती रिवरफ्रंट अब विश्व मानचित्र पर चमक रहा है।
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