यूपी में बिजलीकर्मियों ने बिजली विभाग के निजीकरण प्रस्ताव के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का एलान किया है। राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ ने 12 अक्टूबर 2025 को लखनऊ में मंथन शिविर में यह फैसला लिया कि निजीकरण प्रस्ताव किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा और इसके खारिज होने तक लड़ाई जारी रहेगी।

दिवाली के दौरान उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली देने का भी संकल्प लिया गया है और 16 अक्टूबर को सभी जिलों में संघ की आमसभा का निर्णय हुआ है। इस बीच दिवाली पर बिजली संकट की संभावना को खत्म करने के लिए बिजलीकर्मी दीपावली पर बिजली सप्लाई बाधित न हो, इस पर सहमत हैं और बिजली निगम ने भी त्योहार के दौरान बिजली कटौती नहीं करने के निर्देश दिए हैं। इसलिए दिवाली पर बिजली संकट की संभावना नहीं है, हालांकि निजीकरण के खिलाफ आंदोलन तेज होगा।

निजीकरण विरोध की मुख्य बातें

  • निजीकरण की योजना के खिलाफ बिजलीकर्मियों ने निर्णायक संघर्ष का फैसला किया है।
  • कर्मचारियों को निजी कंपनियों में जाने या सेवा निवृत्त होने के विकल्प दिए गए, लेकिन ये विकल्प खारिज कर दिए गए हैं।
  • आंदोलन में क्रांतिकारी किसान यूनियन और अन्य संगठनों का भी समर्थन है।
  • पावर कारपोरेशन की कार्यप्रणाली और स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध में आवाज बुलंद की जा रही है।

दिवाली पर बिजली आपूर्ति की तैयारी

  • दिवाली के दौरान उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति का संकल्प लिया गया है।
  • यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 28 अक्टूबर से 15 नवंबर तक 24 घंटे बिजली आपूर्ति के निर्देश दिए हैं।
  • बिजली निगम ने दिवाली तक बिजली लाइन मरम्मत और अन्य सुधार कार्य कर लिए हैं ताकि बिजली कटौती न हो।
  • बिजलीकर्मी आंदोलन के बावजूद त्योहार पर बिजली कटौती नहीं होगी।

इसलिए निजीकरण को लेकर बिजलीकर्मियों की लड़ाई जारी है लेकिन दिवाली पर बिजली संकट की संभावना फिलहाल नहीं है, बिजलीकर्मियों ने भी दिवाली के दौरान बिजली बाधित न हो, इसका ध्यान रखने का आश्वासन दिया है।

​कर्मचारियों के तीन विकल्पों में क्या शामिल है

यूपी बिजलीकर्मियों को दिए गए तीन विकल्पों में निम्न शामिल हैं:

  1. निजी कंपनियों में नौकरी स्वीकार करना।
  2. वर्तमान सेवा से निवृत्त (रिटायर) होना।
  3. पावर कारपोरेशन में पुनर्गठन या अन्य पदों पर सेवा जारी रखना।

इन तीन विकल्पों को कर्मचारियों ने खारिज कर दिया है और निजीकरण के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का निर्णय लिया है। वे निजीकरण को मंजूर नहीं कर रहे हैं और आर-पार की लड़ाई का एलान किया है।

सरकार का आधिकारिक बयान

उत्तर प्रदेश सरकार ने बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण को लेकर कई स्तरों पर प्रतिक्रिया दी है। सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया में निम्न प्रमुख बातें शामिल हैं:

  • निजीकरण के फैसले को प्रदेश सरकार के उच्चतम स्तर पर मंजूरी मिली है और यह निर्णय सरकार की ऊर्जा टास्क फोर्स के नेतृत्व में लिया गया है।
  • ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कहा है कि निजीकरण की प्रक्रिया उनके अकेले द्वारा नहीं बल्कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स द्वारा संचालित हो रही है।
  • सरकार ने यह भी कहा है कि निजीकरण का मसौदा और प्रक्रिया कानूनी और नियामक आयोग की मंजूरी पर निर्भर है, जहां कई तकनीकी पहलुओं और प्रश्नों पर जवाब दिए जा रहे हैं।
  • बिजली कर्मचारियों के विरोध को राजनीतिक रूप से प्रेरित करार दिया गया है और विभाग की छवि धूमिल करने वाले कुछ तत्वों को जिम्मेदार ठहराया गया है।
  • सरकार ने आगे बढ़ते निजीकरण के लिए नियामक आयोग को जवाब देने और प्रक्रिया को तेज करने की तैयारी की है।

हालांकि विद्युत कर्मचारी और उपभोक्ता परिषद सरकार से निजीकरण वापस लेने और लोकतांत्रिक एवं कानूनी प्रक्रिया के तहत पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं। कई संगठनों ने इसे असंवैधानिक और उद्योगपतियों के दबाव में लिया गया फैसला बताया है।

सरकार की ओर से फिलहाल निजीकरण को रद्द करने का कोई संकेत नहीं मिला है, बल्कि प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की योजना है।

इस तरह, यूपी सरकार निजीकरण को लेकर गंभीर है, लेकिन कर्मचारियों के विरोध को भी नजरअंदाज नहीं कर रही है और मामले को नियामक आयोग के समक्ष ले जाया जा रहा है।

The Daily Briefingउत्तर प्रदेशस्थानीय / राज्य समाचारHindiKhabar,Hindinews,LatestNews,Lucknow,Privatization,UpGovt,UpNews,UPPCLयूपी में बिजलीकर्मियों ने बिजली विभाग के निजीकरण प्रस्ताव के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का एलान किया है। राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ ने 12 अक्टूबर 2025 को लखनऊ में मंथन शिविर में यह फैसला लिया कि निजीकरण प्रस्ताव किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा और इसके...For Daily Quick Briefing